फिरोजाबाद। आज हर व्यक्ति स्मार्ट बनने की होड़ में लगा है। कोई स्मार्ट फोन, स्मार्ट घर और स्मार्ट सिटी के माध्यम से स्वयं को आधुनिक समझ रहा है, लेकिन वास्तविक स्मार्टनेस बाहरी नहीं, बल्कि अंतरंग की होती है। बाहरी स्मार्टनेस केवल प्रदर्शन कराती है, जबकि अंतरंग की स्मार्टनेस आत्मदर्शन कराती है। संसार का सबसे स्मार्ट व्यक्ति दिगंबर साधु होता है, जो अपनी आत्मा को निर्मल और श्रेष्ठ बनाता है तथा समाज को भी आत्मिक रूप से स्मार्ट बनने की प्रेरणा देता है। यह उद्बोधन आचार्य निर्भय सागर महाराज ने छदामीलाल जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में सैकड़ों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्य श्री ने कहा कि विनम्रता, व्रत, नियम, ज्ञान, ब्रह्मचर्य का पालन, क्षमा धारण तथा मन और आत्मा के पवित्र विचार ही व्यक्ति को वास्तविक अर्थों में स्मार्ट बनाते हैं। जो केवल बाहरी रूप से स्मार्ट बनने का प्रयास करता है, वह तीतर बनता है, जबकि जो भीतर से स्वयं को श्रेष्ठ बनाता है, वही तीर्थंकर बनने की दिशा में अग्रसर होता है। जो व्यक्ति झुकना जानता है, क्रोध और कषायों से दूर रहता है, वही सच्चा स्मार्ट कहलाता है। बाहरी स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद, शाकाहारी भोजन और मधुर वाणी आवश्यक है, वहीं जीवन में विनयशीलता और दूसरों के दिलों को जोड़ने का भाव ही वास्तविक स्मार्टनेस की पहचान है।
जहां दिल जोड़ने के स्थान पर दिल तोड़ने की बातें होती हैं, वहां स्मार्टनेस समाप्त हो जाती है। प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्ज्वलन एवं आचार्य श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य पंकज जैन एलआईसी और ओमप्रकाश अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। धर्मसभा में जैन समाज परिषद के अध्यक्ष विनोद कुमार, अजय एडवोकेट, ललितेश जैन, सत्येन्द्र जैन, अभय जैन, राजेश चौधरी, संभव प्रकाश जैन, अध्यक्ष निमिष जैन, शैलेंद्र जैन, सुशील जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।








