फिरोजाबाद। आचार्य निर्भय सागर महाराज से दीक्षित मुनि मेघदत्त सागर एवं पदमदत्त सागर का दीक्षा दिवस बड़े ही हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य श्री ने कहा बिना दीक्षा के मानव जीवन मूल्यहीन है और पशुतुल्य है। दीक्षा का अर्थ बुरे कार्यों को त्यागना और अच्छे कार्यों को करने का संकल्प करना है। आचार्य निर्भय सागर महाराज ने छदामी लाल जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान कहा कि जो विषयों से उदास हो जाता है, दुनिया उसकी दास हो जाती है। गुरु शिष्य रूपी बांस को बांसुरी बना देते है, मिट्टी को घट बना देते हैं। गोबर को भी गणेश बना देते है और कंकर को शंकर बना देते हैं। मुनि सुदत्तसागर, भूदत्तसागर, मेघदत्त सागर, वृषभदत्त सागर, वासुदत्त सागर, क्षुल्लक चंद्रदत्त सागर एवं क्षुल्लक यशोदत्त सागर के द्वारा आचार्य श्री का पाद्पक्षालन एवं शास्त्र भेंट किया गया। सभी संघस्थ साधुओं ने मुनि मेघदत्त सागर के प्रति अपने-अपने भाव व्यक्त किये और कुछ श्रावक श्रेष्ठीयों ने भी अपने-अपने विचारों को गुरु के चरणों में रखा। प्रमिता जैन ने मंगलाचरण करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन लवली दीदी ने किया।








