फिरोजाबाद। छदामी लाल मंदिर में पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को आर्जव धर्म का महत्व समझाते हुए कहा कि सरलता, ऋजुता और सीधापन ही आर्जव धर्म है, जबकि टेढ़ापन, मायाचार, कुटिलता और वक्रता का अभाव आर्जव है। आर्जव धर्म का प्रतिपक्षी मायाचार है और विपक्ष को समझे बिना पक्ष को मजबूत नहीं किया जा सकता। अध्यात्म में धर्म पक्ष है, जबकि अधर्म विपक्ष; धर्म का अर्थ पुण्य और अधर्म का अर्थ पाप है। उन्होंने कहा कि एक आत्मा में पक्ष और विपक्ष एक साथ नहीं रह सकते। जिस प्रकार लोहार लोहे को गर्म कर घन से पीटकर सीधा करता है, उसी प्रकार सद्गुरु तपस्या की भट्टी में आत्मा को तपाकर चारित्र रूपी घन से उसके छल-कपट का टेढ़ापन दूर करते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि पैसों से परमात्मा नहीं मिलते, बल्कि पैसों के त्याग से परमात्मा मिलते हैं। पैसों से पुण्य नहीं मिलता, बल्कि पुण्य से पैसा और परमात्म पद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि टेढ़ी सड़क पर दुर्घटनाएं अधिक होती हैं, टेढ़ी फसल में अनाज कम और टेढ़ी दीवार वाला मकान जल्दी गिर जाता है। इसी प्रकार टेढ़ी नजर वाले व्यक्ति को समाज संदेह की दृष्टि से देखता है। धर्मसभा में विनोद जैन मिलेनियम, अजय जैन एडवोकेट, संभव प्रकाश जैन, अरुण जैन पीली कोठी, निमेष जैन, शैलेंद्र जैन शैली, विशाल जैन, पंकज जैन, अनुज जैन तुलसी विहार, राजेश जैन, अजय जैन बजाज आदि मौजूद रहे।







