फिरोजाबाद। छदामीलाल जैन मंदिर के सभा मंडप में आयोजित धर्मसभा में वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि गुरु के वचन औषधि का काम करते हैं। जो व्यक्ति गुरु के वचनों को औषधि मानकर ग्रहण करता है, उसका जीवन सार्थक हो जाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि जो चिंता करते हैं, उनका जीवन चिता बनकर रह जाता है, जबकि गुरु मनुष्य को चिंता से मुक्त करके चिंतन की धारा में प्रवाहित करते हैं। गुरु के वचनों को जीवन में उतारने वाला व्यक्ति केवल वर्षों तक नहीं, बल्कि अपने श्रेष्ठ विचारों और संस्कारों के माध्यम से हजारों वर्षों तक समाज के बीच जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कलिकाल में गुरु सबसे अमूल्य धरोहर हैं। गुरु के मार्गदर्शन के बिना प्रभु की प्राप्ति का मार्ग कठिन है। गुरु जीवन को केवल धार्मिक दिशा ही नहीं देते, बल्कि यह भी सिखाते हैं कि मनुष्य अपने जीवन का वास्तविक उद्देश्य पहचाने।
शरीर और आत्मा के संबंध को समझाते हुए कहा कि शरीर हमारा नौकर है और आत्मा हमारी राजा है। यदि मनुष्य राजा रूपी आत्मा को भूलकर दिन-रात शरीर रूपी नौकर की सेवा में ही लगा रहेगा तो वह विद्वान नहीं, बल्कि मूर्ख कहलाएगा। आज मनुष्य बाहरी सुंदरता, सुविधाओं और भोग-विलास को ही जीवन का लक्ष्य मान बैठा है, जबकि उसे अपने अंतर की ओर देखने की आवश्यकता है।
आज का मनुष्य योग को छोड़कर भोग की ओर बढ़ रहा है और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दवाओं के सहारे जीवन चला रहा है। स्थिति यह हो गई है कि व्यक्ति भोजन को पचाने के लिए भी दवा का सहारा लेने लगा है। इच्छाओं का निरोध करके भोजन किया जाएगा तो स्वास्थ्य ठीक रहेगा, लेकिन इच्छाओं का दमन करते हुए जीवन जिया जाएगा, तो शरीर और मन दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा।
धर्म सभा में विनोद जैन मिलेनियम, अरूण जैन पीली कोठी, अजय जैन एड, ललितेश जैन, संभव प्रकाश जैन, निमेष जैन, शैलेंद्र जैन शैली, विशाल जैन, पंकज जैन, अनुज जैन तुलसी, विशाल जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज आदि मौजूद रहे।








