फिरोजाबाद। जीवन में सुख-दुःख का चक्र प्राकृतिक है। रात के बाद दिन और शाम के बाद सुबह आती है, उसी प्रकार बुरे समय के बाद अच्छा समय भी अवश्य आता है। इसलिए मनुष्य को निराश न होकर भगवान पर विश्वास रखते हुए निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए। यह उपदेश आचार्य निर्भय सागर महाराज ने छदामी लाल जैन मंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि धोखा देने वाले से कभी बदला नहीं लेना चाहिए, बल्कि धैर्य रखना ही सच्चा विवेक है। दूसरों की कड़वी बातों को उसी तरह पचा लेना चाहिए, जैसे कड़वी दवा को निगलकर पचाया जाता है। आचार्यश्री ने कहा कि कांच पत्थर से और पत्थर घन से टूटता है, लेकिन इंसान का दिल और रिश्ते कटु वाणी से टूट जाते हैं। इसलिए वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
उन्होंने मौन को आत्मशांति का साधन और मुनि का शक्तिशाली शस्त्र बताया। दूसरों पर उंगली उठाने वाला दुर्जन, जबकि गिरते हुए को उठाने के लिए हाथ बढ़ाने वाला सज्जन कहलाता है। बुराई का जवाब भी भलाई से देना ही अच्छे व्यक्ति का धर्म है। मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज ने बताया मंदिर में प्रतिदिन प्रातः साढ़े आठ बजे मंगल प्रवचन, सायं साढे छह बजे शंका-समाधान तथा प्रत्येक शनिवार व रविवार को विशेष संत की अदालत’ कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।








