-’धूप दशमी पर जिनालयों में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, उत्तम संयम धर्म की हुई पूजा-अर्चना
फिरोजाबाद। दशलक्षण महापर्व के अवसर पर सोमवार को नगर के समस्त जिनालयों में धार्मिक उल्लास और भक्ति की अनूठी छटा देखने को मिली। धूप दशमी को श्रद्धालुओं ने पूरे हर्षाेल्लास एवं विधि-विधान के साथ मनाया। इस दौरान नगर के जिनालयों में उत्तम संयम धर्म की पूजा-अर्चना की गई, जिसमें वक्ताओं व विद्वानों ने इंद्रियों और मन पर नियंत्रण रखने को ही सच्चा संयम बताया।
सुबह से ही नगर के सभी प्रमुख जैन मंदिरों में भगवान के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन जिनालय जैन नगर खेड़ा, शांतिनाथ दिगम्बर जैन जिनालय विभव नगर, पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन जिनालय भौंडेला, आदिनाथ दिगम्बर जैन जिनालय मर्सेलगंज, मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पचोखरा आदि सभी जिनालयों में प्रातः सूर्याेदय पूर्व पिट वस्त्रों में इन्द्रस्वरूप धारण किए श्रद्धालुओं ने श्रीजी का जिनाभिषेक ओर शांतिधारा की। तथा शांतिधारा के प्रासुक जल को अपने माथे पर लगाकर धन्य किया।
तत्पश्चात दशलक्षण धर्म, सोलह कारण एवं पञ्चमेरू पूजा के साथ विशेष मण्डल विधान का आयोजन किया गया। पंडितों एवं संगीताचार्यों के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र प्रभु के चरणों में अष्टद्रव्य अर्पित कर मंगल कामना की। धूप दशमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने जिनालयों में प्रभु की प्रतिमाओं के समक्ष धूप खेवकर वातावरण को सुगंधित कर दिया। मान्यतानुसार इस दिन धूप अर्पित करने से आत्मा के समस्त कर्मरूपी मल का क्षय होता है। मंदिरों में सुगंधित धूप की महक से संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा।
वहीं छदामीलाल जैन मंदिर में आचार्य निर्भयसागर महाराज ने उत्तम संयम धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि संयम का अर्थ नियंत्रण, रोकथाम और सावधानी है। उच्च विचारों से परिपूर्ण होकर चलने, बोलने, खाने-पीने, उठने-बैठने तथा जीवन की प्रत्येक क्रिया को मर्यादा और विवेकपूर्वक करना ही संयम है। उन्होंने कहा कि संयम को बंधन नहीं, मुक्ति का मार्ग समझना चाहिए। असंयम मनुष्य को परावलंबी और निंदनीय बनाता है, जबकि संयम उसे स्वावलंबी, वंदनीय और पूजनीय बनाता है। संयमी व्यक्ति का जीवन स्वयं मंगलमय होता है और वह अपने आचरण से दूसरों के जीवन में भी शांति और सद्भाव का संदेश देता है।








