फिरोजाबाद। छदामी लाल जैन मंदिर में संसघ आचार्य निभर्य सागर महाराज विराजमान है। प्रतिदिन प्रात आचार्य श्री के उपदेश सुनने के लिए सैकड़ो की संख्या में भक्तगण पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे है। आचार्य श्री ने धर्मसभा में कहा कि जीवन विचारों की एक किताब है, विचार उठाना स्वाभाविक है। जैसे पानी में निरंतर तरंग में उठती रहती हैं, वैसे ही प्रत्येक मानव के अंदर विचारों की तरंगे उठती रहती हैं। जब अच्छे और बुरे दोनों विचार एक साथ उत्पन्न होने लगते हैं तब व्यक्ति किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाता है। वह पानी में उठने वाली भंवर की तरह फस जाता है। विचारों के मकड़ जाल में फंसा हुआ। व्यक्ति कभी उचित निर्णय नहीं कर पाता, इसलिए बुरी विचारों से ऊपर उठना जरूरी है। बुरे विचारों से बचने के लिए उन्हें विचारों से बचने के लिए आत्मविश्वास और परमात्मा पर श्रद्धा जरूरी है। जैसे एक इंस्पेक्टर के आते ही देखकर चोर भाग जाते हैं, वैसे ही परमात्मा का हृदय में वास होते ही बुरे विचार भाग जाते हैं। बुरे विचारों से बचने के लिए अच्छी संगति में रहना चाहिए। स्वयं को मोटिवेट करना चाहिए। प्रेरणास्पद साहित्य पढ़ना चाहिए। गलत खानपान से दूर रहना चाहिए। गलत संगति से दूर रहने के लिए संकल्प लेना चाहिए। जो चुनौती को चुनौती देता है। उसका हर व्यक्ति चुनाव करता है और वह नियम से जीवन में सफल होता है। धर्म सभा में निमेष जैन, शैलेंद्र शैली, विशाल जैन, अनुज जैन तुलसी बिहार, राजेश जैन, अजय जैन एड, हीरालाल जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज आदि मौजूद रहे।








