-युवक की मौत के बाद मारपीट से बिगड़ा माहौल, रात 11 से दो बजे तक इमरजेंसी सेवाएं बाधित
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज के सरकारी ट्रॉमा सेंटर में बुधवार रात युवक की मौत के बाद डॉक्टर और तीमारदारों के बीच हुए विवाद का खामियाजा इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भुगतना पड़ा। मारपीट की घटना के बाद डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इमरजेंसी सेवाएं छोड़कर बाहर आ गए। इसके चलते करीब तीन घंटे तक इमरजेंसी सेवाएं बाधित रहीं। रात करीब 11 बजे से दो बजे तक इलाज के लिए पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार परेशान होते रहे।
थाना उत्तर क्षेत्र के सविता नगर निवासी मोहन उर्फ मोनू (28) को बुधवार रात करीब आठ बजे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत पर परिजन ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे थे। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान डॉक्टर और तीमारदारों के बीच मारपीट हो गई। डॉक्टर मंगलम के साथ मारपीट के आरोप के बाद स्वास्थ्यकर्मी लामबंद हो गए और सेवाएं बंद कर ट्रॉमा सेंटर के बाहर धरने पर बैठ गए।
इलाज के लिए पहुंची वृद्धा को नहीं मिला उपचार
विवाद के चलते इमरजेंसी सेवाएं बंद होने से कई मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। रुकैया देवी अपना इलाज कराने सरकारी ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें उपचार नहीं मिल सका। इसी तरह कैलाश सिंह अपनी बेटी को इलाज के लिए लेकर पहुंचे थे, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं बाधित होने के कारण उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मरीजों के तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे और अस्पताल में सामान्य स्थिति बहाल होने का इंतजार करते रहे। रात करीब 11 बजे से दो बजे तक इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित रहने से गंभीर मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कई थानों की फोर्स पहुंची
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना उत्तर समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में देर रात तक अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बना रहा। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया गया।
एसपी ग्रामीण अनुज चौधरी ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त हुई है। वहीं सीएमएस डॉ. नवीन जैन ने कहा कि डॉक्टर के साथ मारपीट करना गलत है और पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी।









