फिरोजाबाद: एफ.एस. विश्वविद्यालय में सजेगा अंतरिक्ष का संसार

-3 से 5 अक्टूबर तक लगेगी विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी

फिरोजाबाद। एफ.एस0 विश्वविद्यालय शिकोहाबाद में 3 से 5 अक्टूबर तक तीन दिवसीय विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, इसरो, अहमदाबाद के सहयोग से होने वाली इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों को भारत की अंतरिक्ष यात्रा, उपग्रह तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की रोमांचक जानकारी मिलेगी। खास बात यह है कि इसरो के वैज्ञानिक एवं विज्ञान संचारक विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनके सवालों के जवाब भी देंगे।

प्रदर्शनी में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की विकास यात्रा को विभिन्न मॉडल और वैज्ञानिक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। डॉ. विक्रम साराभाई एवं भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, सुदूर संवेदन उपग्रह, संचार उपग्रह, उपग्रह कक्षा मॉडल, साउंडिंग रॉकेट, प्रक्षेपण यान और नाविक प्रणाली सहित अनेक विषयों को प्रदर्शित किया जाएगा। एफ. एस. विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. दिलीप यादव, प्रतिकुलाधिपति डॉ. योगेश यादव, ट्रस्टी डॉ. राहुल यादव एवं ट्रस्टी डॉ. नितिन यादव, कुलपति डॉ. संजीव भारद्वाज तथा महानिदेशक डॉ. अभिनव श्रीवास्तव ने प्रदर्शनी को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करेगी।

-चंद्रयान से गगनयान तक दिखेगी भारत की अंतरिक्ष यात्रा

प्रदर्शनी में चंद्रयान-1, चंद्रयान-2, चंद्रयान-3, मंगल कक्षीय अभियान, गगनयान, आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट जैसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। इसके साथ ही भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों एवं अभियानों में आरएलवी-टीडी, स्क्रैमजेट इंजन, निसार, लुपेक्स, मंगलयान-2 और चंद्रयान-4 से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। एलवीएम-3 का इंटरैक्टिव मॉडल, उपग्रहों के विभिन्न घटक, अंतरिक्ष पर पहिए और जल रॉकेट प्रदर्शन विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगे। इन प्रदर्शनों के माध्यम से विद्यार्थी अंतरिक्ष तकनीक को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे मॉडल एवं गतिविधियों के माध्यम से समझ सकेंगे।

Ravi Kumar
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