फिरोजाबाद। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब सुहागनगरी के विश्व प्रसिद्ध कांच और चूड़ी उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण शहर के कई कारखानों में उत्पादन घटा दिया गया है, जबकि अनेक चूड़ी कारखाने बंद करने का निर्णय लिया गया है। इससे हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
उद्यमियों के अनुसार फिरोजाबाद के कांच उद्योग को गेल गैस लिमिटेड के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 15 लाख घनमीटर नेचुरल गैस की आपूर्ति होती है। युद्ध के बाद कतर से गैस आपूर्ति कम होने के चलते पहले तीन लाख घनमीटर की कटौती की गई और इसके बाद शेष कोटे में भी 20 प्रतिशत तक कटौती कर दी गई है। गैस आपूर्ति घटने से उद्योग जगत में हड़कंप मच गया है।
इसी मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश ग्लास मैन्युफैक्चरर्स सिंडीकेट (यूपीजीएमएस) के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें उत्पादन घटाने का निर्णय लिया गया। कांच की बोतल बनाने वाले ऑटोमैटिक कारखानों और चूड़ी के टैंक फर्नेश कारखानों में 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन कम कर दिया गया है, जबकि पाट फर्नेश कारखानों के उद्यमियों ने उत्पादन बंद करने का निर्णय लिया है।
उद्यमियों का कहना है कि गैस महंगी होने के साथ-साथ कच्चा माल और केमिकल भी 15 से 20 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। ऐसे हालात में पुराने दामों पर चूड़ी बनाना संभव नहीं है। चूड़ियों के दाम भी प्रति तोड़ा पांच से दस रुपये तक बढ़ गए हैं, लेकिन बढ़े हुए दामों पर बाजार में खरीदार कम मिल रहे हैं।
इंडस्ट्रियल स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष बिन्नी मित्तल का कहना है कि गैस कोटे में कटौती के बाद उद्योग संकट में है। कई उद्यमी गैस बिल आने का इंतजार कर रहे हैं और हालात स्पष्ट होने तक उत्पादन कम या बंद करने पर मजबूर हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बड़ी संख्या में चूड़ी कारखानों को बंद रखने का निर्णय लिया जा रहा है। गेल गैस के अधिकारियों द्वारा केवल मेल किया गया है, कि गैस में कटौती की जा रही है। कटौती गैस से अधिक प्रयोग करने पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। हालांकि गेल गैस द्वारा स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं बताया है कि कारखानेदारों को कितनी गैस दी जाएगी और किस रेट के हिसाब से दी जाएगी।
दूसरी ओर कांच एवं चूड़ी मजदूर सभा के महामंत्री रामदास मानव ने कहा कि होली के बाद फिर से कारखाने बंद होने की स्थिति बन गई है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो जिले के करीब पांच से सात लाख मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उद्योग जगत का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो शहर का कांच और चूड़ी उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है।

