फिरोजाबाद। जैन धर्म में प्रतिमा की प्रतिष्ठा और उसकी पूजा करने का विधान है जब कोई भक्ति दर्शन करने जाता है, तब वह मंदिर की तीन परिक्रमा लगता है। यह उपदेश आर्चाय निर्भय सागर महाराज ने छदामी लाल जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में दिए।
आचार्य श्री ने कहा की धातु की प्रतिमा और यंत्र रखकर प्रतिष्ठा करने के उपरांत उसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड तैयार होता है, जब हम क्लाकवाइज परिक्रमा लगाते हैं तब फिजिक्स के सेंट्रीफोर्ड गति के नियमानुसार ऊर्जा का केंद्रीकरण होता है। उसे ऊर्जा को भक्त अपने आत्मसात कर लेता है और तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है। लेकिन उसे समय नंगे पैर शांत मन से मंत्र उच्चारण करते हुए परिक्रमा करना चाहिए। उस समय मनोवैज्ञानिक दशा के अनुसार भावनाएं पवित्र होती हैं।
तनाव उत्तेजना, डिप्रेशन एंजायटी एवं मानसिक असंतुलन दूर होता है। आचार्य श्री ने कहा जिनेंद्र भगवान, गणेश और हनुमान की तीन, विष्णु की चार और सूर्य देवता की सात परिक्रमा करना चाहिए। धर्म सभा में विनोद जैन मिलेनियम, अजय जैन एडवोकेट, ललितेश जैन, संभव प्रकाश जैन, निमेष जैन, शैलेंद्र शैली, विशाल जैन, पंकज जैन, अजय जैन बजाज, राज जैन, आदिश जैन आदि मौजूद रहे।








