-तीन दिवसीय रत्नत्रय व्रत का हुआ शंखनाद
फिरोजाबाद। दशलक्षण महापर्व की पर्व की श्रृंखला में आज नौवें दिन जैन मंदिरो में उत्तम आकिंचन्य धर्म की विशेष पूजा-अर्चना एवं विधान का आयोजन अत्यंत धूमधाम और भाव-भक्ति के साथ किया गया। इसके साथ ही आज से तीन दिवसीय रत्नत्रय व्रत का भी शुभारंभ हो गया, जिसके प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने सम्यक दर्शन धर्म की विशेष आराधना की।

नगर के सभी जैन मंदिरों में संगीतमय मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच भक्तों ने जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्य से अर्घ्य समर्पित कर पुण्य अर्जन किया। छदामी लाल जैन मंदिर में आचार्य निर्भय सागर महाराज ने उत्तम आकिंचन्य धर्म के गुणार्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि परिग्रह यानी धन, दौलत, वैभव और बाहरी वस्तुओं के प्रति ममता का त्याग करना ही आकिंचन्य है। जब तक आत्मा में यह मेरा है की भावना बनी रहती है, तब तक वास्तविक शांति संभव नहीं है। कुछ भी मेरा नहीं है का निष्काम भाव ही आत्मा को परमात्मा बनाने की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से परिग्रह की सीमाओं को घटाकर संयमित जीवन जीने का आह्वान किया।
सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग का प्रथम सोपान-गुरू मां विजयमती
गुरु मां विजयमती माताजी ने कहा कि सम्यक दर्शन का अर्थ है सत्य और देव-शास्त्र-गुरु पर सच्चा विश्वास व श्रद्धा रखना। सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग की पहली सीढ़ी है, जिसके बिना ज्ञान और चरित्र भी सम्यक नहीं हो सकते। रत्नत्रय के प्रथम दिन सम्यक दर्शन की आराधना से जीव में सम्यक्तव का बीजारोपण होता है।









