फिरोजाबाद: मोह आत्मा का सबसे बड़ा शत्रु, धर्म जीवन का सच्चा मित्र-निर्भय सागर

फिरोजाबाद। चंदाप्रभु जैन मंदिर में वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भयसागर महाराज ने कहा कि संसार में कोई भी पदार्थ स्वयं अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि हमारी अनुकूलता और प्रतिकूलता ही उसे अच्छा या बुरा बना देती है।

उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार मित्र शत्रु और शत्रु मित्र बन सकता है। भोजन जीवन का आधार है, लेकिन अनुचित भोजन अहितकारी बन जाता है। इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने दृष्टिकोण से सही कार्य करता है, किंतु दूसरों को वही कार्य गलत लग सकता है। उन्होंने कहा कि मोह मदिरा के समान और विषय-कषाय काले नाग के समान हैं, जो आत्मा को अनंत भवों तक दुःख देते हैं। माता-पिता का कर्तव्य संतान को केवल सुविधाएँ देना नहीं, बल्कि ज्ञान और उत्तम संस्कार प्रदान करना भी है।

संस्कारहीनता के कारण आज पारिवारिक संबंधों में कटुता बढ़ रही है। आचार्यश्री ने कहा कि मित्र बनाने से पहले उसके गुण-दोष, संगति, संस्कार और आचार-विचार अवश्य परखने चाहिए। धर्म सभा में अरुण जैन पीली कोठी, संभव प्रकाश जैन, ललितेश जैन, अजय जैन एडवोकेट, अशोक जैन तुलसी विहार, राजेश जैन, निमेष जैन, शैलेंद्र जैन शैली, विशाल जैन, पंकज जैन, अजय जैन बजाज आदि मौजूद रहे।

ravikumar
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