फिरोजाबाद। नारी दुनिया की सूत्रधार है, संस्कृति और संस्कार की जननी है, प्रेम करुणा दया की मूर्ति है, सील संयम ही नारी की संपत्ति है, व्यक्तित्व ही उसकी सुंदरता है। नारी के बिना संसार अधूरा है, नारी और पुरुष मिलकर अपनी जिंदगी आगे बढ़ते हैं। सफलता के पीछे लोग कहते हैं कि सफलता के पीछे नारी का हाथ होता है, लेकिन मेरी दृष्टि में सफलता के पीछे नारी का हाथ कम गुरु का हाथ ज्यादा होता है। यह उपदेश आचार्य निर्भय सागर महाराज ने छदामी लाल जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में दिए।
उन्होंने कहा पशुओं को नहीं पुरुषों को शादी करना आवश्यक है, पशुओं की संतान जन्म से ही शक्तिशाली होती है, जबकि पुरुष की संतान नाजुक होती है इसलिए उसे लालन-पालन और संरक्षक की परम आवश्यकता होती है। यह तभी हो सकता है जब विवाह करके जिम्मेदारी निभाई जाती है। शादी इसलिए भी जरूरी है कि तन मन और जीवन की जरूरते शादी के बाद ही सुव्यवस्थित हो पाती हैं। सामाजिक मर्यादाएं और संतुलन शादी से ही संभव है। शादी के बिना अराजकता और अन्याय फैल सकता है। जो अध्यात्म और वैराग्य से युक्त होता है उसे शादी की कोई जरूरत नहीं होती है। आचार्य श्री ने कहा असीमित विकास अति धन विनाश का कारण होता है क्योंकि अति सर्वत्र वर्जेत यह नीति है।
इसी के कारण युद्ध होते रहे है और आगे होते रहेंगे, प्रकृति का शोषण हो रहा है और होता रहेगा। पर्यावरण क्षति हो रही है। नारी की महिमा भारतीय संस्कृति में गायी गई है इसी संबंध में आचार्य श्री ने कहा नारी की महिमा जिनवाणी गायी है, नारी से नर ने दिल से प्रीत लगाई है, नारी के बिना यह दुनिया अधूरी है इसलिए नारी ही लक्ष्मी और सरस्वती देवी कहलाई है। कार्य करने में नई गृह मंत्री कहलाती है भोजन के समय माता शयन के समय रंभा कहलाती है वचन में दासी और धर्म की मूर्ति बनकर आई है जो क्षमा धारण करें वही वास्तव में नई कहलाई है। श्रावक सृष्टि का सौभाग्य सुशील कुमार जैन, नवीन जैन, नम्रता जैन को मिला। धर्म सभा में विनोद जैन मिलेनियम, अजय जैन एड, संभव प्रकाश जैन, अरुण जैन पीली कोठी, निमेष जैन, शैलेंद्र शैली, पंकज जैन, अनुज जैन तुलसी विहार, राजेश जैन, अजय जैन बजाज आदि मौजूद रहे।







