फिरोजाबाद: आत्मा की शुद्धि और कर्मों की निर्जरा के लिए तपस्या ही सर्वाेत्तम मार्ग-निर्भय सागर

फिरोजाबाद। सुहागनगरी के समस्त जैन जिनालयों में दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना एवं भक्ति भाव के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य संतों ने कहा कि आत्मा की शुद्धि और कर्मों की निर्जरा के लिए तपस्या ही सर्वाेत्तम मार्ग है। तप केवल शरीर को सुखाना नहीं, बल्कि मन, वचन और काय की प्रवृत्तियों को आत्म-कल्याण में लगाना है।

छदामीलाल जैन मंदिर में विराजमान वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर महाराज के पावन सानिध्य में प्रातःकाल जिनेन्द्र देव का अभिषेक, शांतिधारा एवं दशलक्षण मण्डल विधान का पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा, तप वह अग्नि है जिसमें तपकर आत्मा कुंदन बन जाती है। जब तक इच्छाओं का निरोध नहीं होगा, तब तक सच्चे तप का प्राकट्य असंभव है। सांसारिक सुख क्षणिक हैं, जबकि तपस्या से प्राप्त आत्म-सुख शाश्वत है।

श्रावकों को अपनी दिनचर्या में संयम और स्वाध्याय को शामिल कर जीवन को संस्कारवान बनाना चाहिए। नई बस्ती जिनालय में आर्यिका विजयमती माताजी का सानिध्य एवं बाहुबली दिगम्बर जैन जिनालय (नई बस्ती) में पूज्य गुरु मां आर्यिका विजय मती माताजी के सानिध्य में वृहद धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरु मां ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को बचपन से ही जैन धर्म के मूलोत्तर गुणों और संस्कारों से जोड़ना माता-पिता का मुख्य कर्तव्य है। धर्म ही जीवन का सच्चा आधार है, जो विपत्ति के समय ढाल बनता है।

-बच्चों की भावपूर्ण नृत्य नाटिकाओं ने मोहा मन

फिरोजाबाद। धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग एवं शिक्षाप्रद कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत नृत्य नाटिकाओं में भगवान महावीर के जीवन आदर्शों, उत्तम तप धर्म के महत्व और नैतिक मूल्यों का जीवंत चित्रण किया गया। बच्चों के अभिनय और भक्ति भाव को देखकर उपस्थित जनसमुदाय भावविभोर हो गया और पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं और नृत्य नाटिकाओं में भाग लेने वाले प्रतिभावान बच्चों को आचार्य श्री एवं गुरु मां के आशीर्वाद से पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

Ravi Kumar
Ravi Kumar
Articles: 532

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *