फिरोजाबाद। वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भयसागर महाराज के सानिध्य में छदामी लाल महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जलयात्रा, शांतिधारा एवं भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सेठ महावीर मुन्ना बाबू, अलका जैन एवं दिव्यांश जैन ने अभिषेक किया एवं सभी का आभार व्यक्त किया। गाजे-बाजे के साथ मंदिर एवं भगवान बाहुबली की परिक्रमा लगाई गई। हजारों श्रद्धालु ने शांति धारा कार्यक्रम सम्मिलित हुए।

आचार्यश्री ने मंत्रों का उच्चारण करते हुए कहा कि क्षमा धर्म वही है, जिसमें बिना शर्त क्षमा मांगी जाती है। अपनी गलती स्वीकार कर ईमानदारी, सकारात्मक दृष्टि और हृदय से क्षमा मांगनी चाहिए। क्षमा मांगने के बाद व्यक्ति को स्वयं को हल्का महसूस करना चाहिए। जिसने क्षमा किया, उसके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहना चाहिए “मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरे ऊपर इतना उपकार किया।” आचार्यश्री ने कहा कि क्षमा मांगने से किसी का मान कम नहीं होता, बल्कि स्वाभिमान और बढ़ता है। क्षमा एक भावनात्मक एवं मानसिक प्रक्रिया है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, रिश्ते मधुर बनते हैं, ब्लड प्रेशर एवं दिल की बीमारी का खतरा कम होता है तथा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।








