फिरोजाबाद। वैज्ञानिक संत आचाय निर्भयसागर महाराज ससंघ द्वारा छदामीलाल जैन मन्दिर में प्रतिदिन ज्ञान की वर्षा कर रहे। जिसका श्रोतागण धर्मलाभ लेकर आनंदित हो रहे है।
आचार्य श्री ने धर्मसभा में कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का धर्म है। दिगम्बरत्व हमारी संस्कृति है और विश्वव्यापी धर्म है। दिगम्बरत्व हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है क्योंकि दिगम्बरत्व वासना का नहीं, उपासना का प्रतीक है, दिगम्बरत्व प्रर्दशन का नहीं आत्मदर्शन का प्रतीक है, दिगम्बरत्व आत्म साधना के लिए है साधनों के लिए नहीं, शव पर कपड़े डालना और फिर जलाने अथवा दफनाने के पूर्व पचन खोल कर कफन को हटाना दिगंबर से मुक्ति का प्रतीक है। ब्रह्मा के अंश बनकर नंगे ही जन्मे है, लेकिन विषयवासना आने के कारण पर्दे में रहने का भी फरमान है, परंतु जी जन्मजात बालक की तरह माँ की गोद में निर्विकार रहता है।
परमात्मा की प्राप्ति उसे ही होती है जो निश्चल, निष्कपट और वासना से रहित होता है। भगवान महावीर स्वामी ने कहा कि मुर्दे के कपड़े उतारने से मोक्ष नहीं मिलता, बल्कि जिंदा में ही शरीर को मुर्दा मानकर अंदर बैठे शिव की साधना करने से शिवत्व की प्राप्ति होती है, इसलिए नगनत्व विश्वव्यापी धर्म है। आचार्यश्री ने कहा संत वही है, जिसने अपने जीवन में शांति को धारण कर लिया है। अपने संसार का अंत कर लिया है, जो सच्चा ज्ञान सच्ची आस्था सच्चा आचरण से युक्त होता है। सच्चे साधु की सेवा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
जहां मंदिर होता है वहां औषधालय है भोजनालय है और पाठशाला है। स्कूल में सिर्फ शिक्षा मिलती है, संस्कार नहीं, लेकिन मंदिर में शिक्षा और संस्कार दोनों मिलते हैं। धर्म सभा में विनोद मिलेनियम, अरुण जैन पीली कोठी, अजय जैन एड, राजेश जैन, निमेष जैन, विशाल जैन, पंकज जैन, अनुज जैन तुलसी विहार, हीरालाल जैन, शैलेंद्र जैन शैली, मीडिया प्रभारी अजय जैन बजाज आदि मौजूद रहे।





