फिरोजाबाद। नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास ने कंस वध, गोपी उद्वव संवाद, श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह की लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा में श्रीकृष्ण-रूक्मणी के स्वरूपों की सजाई गई। श्रद्वालुओं ने विवाह के दौरान रूक्मणी का कन्यादान लिया।
किशोरी कृपा चौरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में गोपाल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा कथा व्यास आचार्य निशांत मिश्रा ने कंस बंध लीला का वर्णन करते हुए कहा कि मथुरावासियों की रक्षा के लिए पालन हार में श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर अपने माता, पिता, नाना को कारागार से आजाद कराकर मथुरावासियों को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। गोपी-उद्वव संवाद में कहा कि श्रीकृष्ण ने उद्वव को भक्ति के ज्ञान देने के लिए गोकुल भेजा। जहॉ गोपियों ने उद्वव को भक्ति का मार्ग दिखाया।
कथा व्यास ने कहा कि रूक्मणी भगवान श्रीकृष्ण को मन हीं मन पति मान चुकी थी। जब श्रीकृष्ण को यह मालूम हुआ, तो श्रीकृष्ण रूक्मणी से विवाह करने के लिए चल पड़े। श्रीकृष्ण-रूक्मणी विवाह की झांकी के दर्शन कर भक्तों ने कन्यादान कर पुण्यलाभ लिया। कथा में राम मंदिर निर्माण की तृतीय वर्षगांठ पर हर्ष व्यक्त करते हुए जय श्री राम के नारे गंजूे। कथा में मुख्य यजमान रामबाबू झा, सुमन लता, महापौर कामिनी राठौर, अरविंद पचौरी, पूनम शर्मा, राजेश दुबे, विनोद पचौरी, राजपाल यादव, राकेश बाबू शर्मा, जेपी मित्तल, नवीन उपाध्याय, गौरव जैन, किशन शर्मा, राजेश शर्मा, पवन गुप्ता, भानु उपाध्याय, मनोज शर्मा आदि मौजूद रहे।

