टूंडला। तहसील क्षेत्र के गांव बसई में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिन कथा व्यास संत विष्णु चेतन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने 16,108 रानियों के प्रसंग के साथ श्रीकृष्ण-सुदामा की सच्ची मित्रता की कथा सुनाई। जिसे सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास संत विष्णु चेतन महाराज ने कहा कि भगवान की शरण में जाने वाला भक्त कभी निराश नहीं होता और सच्ची श्रद्धा ही जीवन को सार्थक बनाती है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की 16,108 रानियों के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि नरकासुर के अत्याचार से मुक्त कराई गई कन्याओं को समाज में सम्मान दिलाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। यह भगवान की करुणा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में न तो धन-दौलत का अहंकार होता है और न ही किसी प्रकार का स्वार्थ। जब सुदामा द्वारका पहुंचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र को गले लगाकर उनका स्वागत किया और उनकी दरिद्रता दूर कर दी। इस प्रसंग को सुनकर कथा पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा के दौरान यज्ञपति के रूप में फूलवती और नेत्रपाल सिंह ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। वहीं परीक्षत के रूप में महावीरी देवी और लाल सिंह ने भी श्रद्धा भाव से कथा श्रवण किया।

