फिरोजाबाद: राष्ट्र निर्माण के लिए स्वयं में परिवर्तन की आवश्यकता-शेखर जी

-हिंदू सम्मेलन में कलश लेकर पहुंची मातृ शक्ति, मार्ग में सजाई गई रंगोली

फिरोजाबाद: राष्ट्र निर्माण के लिए स्वयं में परिवर्तन की आवश्यकता-शेखर जी

-हिंदूओं में चेतना और एकजुटता का आधार है सम्मेलन

फिरोजाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर सुहागनगरी में विराट हिंदू सम्मेलनों की एक श्रंृखला नजर आ रही है। इसी क्रम में रविवार को गोपाल आश्रम में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में कलश लेकर पहुंची मातृ शक्ति के अभिनंदन के लिए मार्ग में रंग बिरंगी आकर्षण रंगोलियां सजाई गईं। सम्मेलन में टोली के रूप में हिंदू समाज के लोग ढोल नगाड़ों के साथ बड़े ही उत्साहित मुद्रा में पहुंचे। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर प्रचारक शेखर जी ने कहा कि पूरे भारत वर्ष में आयोजित हो रहे, यह हिंदू सम्मेलन हिंदुजन चेतना और एकजुटता का आधार हैं। संघ द्वारा किए गए प्रत्येक कार्य के पीछे एक विशेष राष्ट्र हित निहित रहता है। संगठन का उद्देश्य है कि समाज की सज्जन शक्तियों के सहयोग से हिंदुत्व का भाव और स्वाभिमान जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने भारत की समृद्ध संस्कृति और विश्व कल्याण की भावना से निहित विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी संस्कृति कहां चली गई, हमारी सभ्यता कहां चली गई। ऐसा कौन सा देश है, जिसमें 365 दिन है तो 365 दिन त्योहार होते हों। एक दिन में 5 से ज्यादा महापुरुषों की जयंती नहीं मनाई जाती हो ऐसा कौन सा देश है, जिसमें कई प्रकार की भाषाएं बोली जाती है।

उन्होंने संगठन द्वारा दिए गए पंच परिवर्तन जैसे कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी आचरण, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति एक इकाई के रूप में है। व्यक्तियों से परिवार, फिर समाज और इसी प्रकार विविध इकाइयों से राष्ट्र का निर्माण होता है। संगठन के यह पंचपरिवर्तन हमें अपने जीवन के आचरण में उतारने होंगे, तो निश्चित ही हमारा राष्ट्र पुनः परम वैभव को प्राप्त होगा। स्वामी रामदास ने सच्चे धर्म की परिभाषा बताई। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेविका समिति की महानगर बौद्धिक प्रमुख सावित्री देवी, कार्यक्रम अध्यक्ष लक्ष्मी सिकरवार आदि मौजूद रहे।